Thursday 10 February 2011

सैफ विंटर गेम्स, बदइंतजामियाँ और पांगती का हश्र!

औली में 31 दिसम्बर को हुई बर्फबारी ने आयोजकों की काली करतूतों को ढँकने का काम किया। 14 जनवरी की रात हुई भारी बर्फबारी ने तो सारा इतिहास दफन कर डाला। 16 जनवरी को खेल समाप्ति के ठीक बाद आयोजन के कर्णधार पूर्व आई.ए.एस. सुरेन्द्र सिंह पांगती ने आर्गेनाइजिंग टीम से इस्तीफा दे दिया। उन्हीं के प्रयासों से ही विदेशी टीमें और अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के निर्णायक यहाँ आये थे। शायद पांगती को सैफ खेलों से पहले ही हट जाना चाहिए था, लेकिन वे लम्बे समय से सैफ का सपना देख रहे थे। चमोली में अपनी सरकारी सेवा के प्रारम्भिक दौर से ही वे औली के विकास व स्थानीय युवाओं के लिये रोजगार का जरिया तलाशने के प्रयासों में जुटे रहे थे। विंटर गेम्स फेडरेशन के अध्यक्ष बनने के बाद वे सैफ को भारत व फिर उत्तराखंड में कराने की लाबीइंग में रहे। तत्कालीन एन.डी. तिवारी सरकार ने फंड देने में असमर्थता जताई तो केंद्र से 110 करोड़ रुपये की जुगत करने वाले भी वही थे। उनकी लगन देख एनडी भी मुहिम में शामिल हो गये। लेकिन 2007 में खंडूरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद लगातार तीन आचार संहिताओं से कामकाज प्रभावित रहे। फिर निशंक गद्दी पर सवार हुए। तीन मुख्यमंत्रियों के बदलने के साथ, तीन बार खेल भी टले। मगर पांगती ने अकेले सैफ के झंडे को बुलंदी से उठाये रखा और तमाम लालफीताशाही के बीच इन्फ्रास्ट्रक्चर कार्य को आगे बढ़ाने में कामयाब रहे। .................



2 comments:

  1. salutations to shri s s pangtey ji for this endevor

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  2. yup! he really deserves accolades for his feats!

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